घोड़ा बैठ क्यों नहीं पाता? खड़े-खड़े सोने के पीछे छुपा है ये चौंकाने वाला सच

आपने घोड़े को दौड़ते और खड़े होकर खाते तो देखा होगा, लेकिन बैठे हुए शायद ही कभी देखा होगा।

घोड़े की शारीरिक बनावट ऐसी होती है कि उसका भारी शरीर और लंबे-पतले पैर बैठने के लिए बने ही नहीं होते।

बैठने पर घोड़े के पैरों और जोड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है, जो उसे असहज कर देता है।

घोड़ा स्वभाव से सतर्क जानवर होता है और खतरा महसूस होते ही तुरंत भागने के लिए तैयार रहता है।

अगर घोड़ा बैठा हो, तो उसे उठकर भागने में ज्यादा समय लगता है, इसलिए वह बैठने से बचता है।

वैज्ञानिक मानते हैं कि घोड़ों के पैरों की बनावट खड़े रहने और दौड़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल होती है।

यही वजह है कि घोड़े अक्सर खड़े-खड़े ही झपकी लेकर अपनी नींद पूरी कर लेते हैं।

घोड़ा आमतौर पर तभी बैठता है जब वह बेहद थका हुआ हो या किसी चोट या बीमारी से जूझ रहा हो।

सर्कस या शो में दिखने वाले बैठे हुए घोड़े खास ट्रेनिंग का नतीजा होते हैं, यह उनकी प्राकृतिक आदत नहीं है।

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