स्टेज पर फिसला रूस का पहला ह्यूमनॉइड ‘AIdol’, सोशल मीडिया पर ‘वोडका’ मीम्स की बाढ़—कंपनी बोली, “कैलिब्रेशन इश्यू”

मॉस्को में हुए एक हाई-प्रोफाइल लॉन्च इवेंट में रूस का पहला एआई-पावर्ड ह्यूमनॉइड रोबोट AIdol ऐसी वजह से सुर्खियों में आया, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। “AI क्रांति” का चेहरा बनकर पेश किया जा रहा यह रोबोट स्टेज पर आते ही लड़खड़ा गया और कुछ कदम बाद सीधे मुंह के बल गिर पड़ा। पल भर में मौजूद दर्जनों मोबाइल कैमरों ने यह पल कैद कर लिया और कुछ ही घंटों में वीडियो सोशल मीडिया पर छा गया—मीम्स में ‘वोडका’ जोक सबसे ज्यादा दिखे।
क्या हुआ स्टेज पर?
इवेंट में जैसे ही AIdol की एंट्री हुई, बैकग्राउंड में Rocky थीम बजने लगी। रोबोट दो डेवलपर्स के साथ धीरे-धीरे चलता हुआ सामने आया। चाल में डगमगाहट थी—दायां हाथ उठाकर दर्शकों की ओर वेव करते हुए बैलेंस और बिगड़ गया और वह आगे की ओर गिर पड़ा। तुरंत दो-तीन ऑपरेटर दौड़े, रोबोट को उठाने की कोशिश की और ब्लैक शीट से उसे कवर कर स्टेज से हटाया गया। लेकिन तब तक “गिरने” का क्लिप इंटरनेट पर अपनी रफ्तार पकड़ चुका था।
मीम्स और रिएक्शन
वीडियो वायरल होते ही X और इंस्टाग्राम पर मज़ाकिया कैप्शंस की बाढ़ आ गई—कई पोस्ट्स में लिखा गया, “Russia’s Robot had too Much Vodka.” कुछ यूज़र्स ने इसे रूस के टेक शोकेस पर तंज बताया, तो कुछ ने कहा कि “लाइव डेमो का यही रिस्क है—गलती सबके सामने हो जाती है।” कई टेक फोरम्स ने भी इस क्लिप को शेयर किया और ह्यूमनॉइड की स्थिरता पर गंभीर सवाल उठाए।

कंपनी ने क्या कहा?
रूसी पोर्टल्स पर छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIdol बनाने वाली कंपनी Idol के सीईओ व्लादिमिर वितुखिन ने इसे “कैलिब्रेशन/पर्यावरण” से जुड़ी दिक्कत बताया। उनका कहना था, “हमने अलग-अलग परिस्थितियों में कई टेस्ट किए हैं। यह एक बिल्कुल नया वातावरण था—कम रोशनी या किसी अस्थाई खराबी की वजह से समस्या हुई। हम टीम के साथ मिलकर खामियों की जांच कर रहे हैं।” कंपनी ने यह भी बताया कि AIdol फिलहाल करीब 77% रूस-निर्मित कॉम्पोनेन्ट्स से बना है और आने वाले महीनों में इसे 93% तक बढ़ाने का लक्ष्य है, ताकि विदेशी पार्ट्स पर निर्भरता घटे।
स्टेज-फेल का मतलब क्या?
- लाइव रोबोट डेमो कठिन होते हैं: असमतल सतह, रोशनी, भीड़, वायरलेस इंटरफेरेंस—छोटे फैक्टर भी बैलेंस और सेंसर-रीडिंग बिगाड़ सकते हैं।
- शुरुआती फेज़ की मशीनें: AIdol अभी टेस्टिंग/कैलिब्रेशन चरण में है। ऐसे में गिरना, रिबूट की जरूरत या ऑपरेटर असिस्ट सामान्य है।
- डिजाइन प्राथमिकताएं: ह्यूमनॉइड में “मानव जैसी” चाल और बैलेंस सबसे बड़ा इंजीनियरिंग चैलेंज है—हार्डवेयर, सेंसर-फ्यूज़न और रियल-टाइम एआई का सटीक मेल जरूरी होता है।
रूस की एआई महत्वाकांक्षा पर असर?
एक वायरल गलती ब्रांड-इमेज को जरूर झटका देती है, लेकिन तकनीक की दुनिया में शुरुआती विफलताएं नई नहीं। अगर Idol टीम अपनी कैलिब्रेशन/कंट्रोल एल्गोरिद्म को बेहतर करती है और स्थिरता दिखा पाती है, तो AIdol आगे चलकर शिक्षा, डेमो, फ्रंट-डेस्क असिस्टेंस जैसे हल्के-फुल्के टास्क में जगह बना सकता है। असली परीक्षा तब है जब मशीन लगातार—भीड़, रोशनी, शोर—हर तरह के रियल-वर्ल्ड माहौल में भरोसेमंद साबित हो।

क्या सीख मिलती है?
- पारदर्शी रोडमैप: पब्लिक डेमो से पहले सीमाएं साफ़ बताना अपेक्षा-प्रबंधन में मदद करता है।
- सुरक्षा पहले: लाइव इवेंट में फॉल-सेफ/स्पॉट्टर टीम और कवर प्रोटोकॉल अनिवार्य हों।
- दोहराए गए ट्रायल्स: मंच, लाइटिंग और ऑडियो-इंटरफेरेंस के साथ बार-बार रिहर्सल बेहतर परिणाम देते हैं।
Russia debuted its first AI humanoid, AIdol, which walked onto the stage to the Rocky theme song, only to immediately tumble.
Clearly, the bot wasn’t quite ready for its victory lap yet.😂 pic.twitter.com/xVHDREVXki
— RoboHub🤖 (@XRoboHub) November 12, 2025
निष्कर्ष
AIdol का “स्टेज-फॉल” मज़ाक का कारण जरूर बना, पर यह याद दिलाता है कि ह्यूमनॉइड्स की दौड़ लैब से बाहर निकलकर अब वास्तविक मंच पर आ गई है। अगला कदम कंपनी के लिए भरोसा वापस जीतना है—स्थिर डेमो, स्पष्ट प्रगति और समय के साथ बेहतर प्रदर्शन। मीम्स कुछ दिन चलेंगे, लेकिन तकनीक की कसौटी पर टिकने के लिए मशीन को अब मैदान में सही ताल ढूंढनी होगी।
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