Robot in Pacific Ocean: 1300 मीटर गहराई में मिली डरावनी गर्मी–ठंडी गैस की दुनिया, लेकिन इस खोज से खुल सकता है विज्ञान का नया रास्ता

Robot in Pacific Ocean: वैज्ञानिकों को 1300 मीटर गहराई में मिली ‘छिपी दुनिया’, जहाँ गर्मी और बर्फ जैसी गैस एक साथ मौजूद है
प्रशांत महासागर की गहराइयों में क्या हो रहा है, यह दुनिया बहुत कम जानती है। लेकिन हाल ही में एक रोबोट ने जो खोज की है, उसने समुद्री विज्ञान की समझ को ही बदल दिया। यह खोज न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे भी खोलती है।
जर्मनी के वैज्ञानिकों की टीम ने जुलाई 2023 में एक खास अभियान चलाया, जिसमें Robot in Pacific Ocean नाम की यह गहरी खोज दर्ज की गई। यह रोबोट पापुआ न्यू गिनी के पास, सतह से 1300 मीटर नीचे भेजा गया, जहाँ उसने एक ऐसी जगह की खोज की, जिसे पहले किसी ने न देखा था और न ही कैमरे में कैद किया था।
इस रहस्यमयी जगह का नाम रखा गया—करम्बुसेल (Karambunsell)।
क्या है करम्बुसेल की खासियत?
करम्बुसेल पृथ्वी का ऐसा समुद्री क्षेत्र है जहाँ एक अनोखी प्राकृतिक घटना एक साथ होती है—
51°C तक गर्म ज्वालामुखीय पानी और
3°C से 20°C तक की ठंडी मीथेन गैस
सिर्फ कुछ सेंटीमीटर की दूरी पर एक ही जगह से निकलती है।
किसी भी वैज्ञानिक मिशन में अब तक ऐसा विरोधाभास नहीं देखा गया था।
एक जगह तो मीथेन गैस 10.2°C की थी और उससे केवल 30–40 सेंटीमीटर दूर 41.9°C का उबलता पानी बह रहा था।
ये दोनों प्राकृतिक तत्व एक-दूसरे के बेहद करीब हैं, लेकिन फिर भी दोनों अपने-अपने तापमान पर स्थिर रहते हैं।
यह घटना पृथ्वी के अंदर चल रही ऊर्जा और रासायनिक प्रक्रियाओं को लेकर नए सवाल खड़े करती है।

मीथेन गैस की मात्रा चौंकाने वाली थी
रोबोट द्वारा लिए गए नमूनों से पता चला कि इस क्षेत्र की गैसों में 80% से अधिक मीथेन मौजूद है—जो दुनिया के किसी भी ज्ञात समुद्री क्षेत्र से कई गुना ज्यादा है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस मीथेन का स्रोत ज्वालामुखी की गर्मी है, जिसने समुद्र तल के नीचे मौजूद कार्बनिक पदार्थों को विघटित कर दिया।
इस गैस में भारी हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ आर्सेनिक और पारे जैसे जहरीले तत्व भी पाए गए।
यह खोज बताती है कि समुद्र की गहराइयों में ऐसे रासायनिक वातावरण भी मौजूद हो सकते हैं, जो जीवन की उत्पत्ति या पृथ्वी के विकास की कहानी से जुड़ाव रखते हों।
कैसे हुई यह खोज?
इस मिशन में GEOMAR का Kiel-6000 deep-sea robot इस्तेमाल किया गया।
यह रोबोट:
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पानी
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गैस
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चट्टानें
के सैंपल लेकर वैज्ञानिकों के पास वापसी करता है।
अक्सर गर्म पानी निकलने वाली समुद्री जगहों पर बड़ी-बड़ी सल्फाइड चिमनियाँ बनती हैं।
लेकिन करम्बुसेल में ऐसा कुछ नहीं था।
यहाँ ज्वालामुखी की चट्टानों की दरारों से सीधे चमकता हुआ गर्म पानी बह रहा था—जैसे कोई पिघला धातु बाहर निकल रही हो।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह समुद्री क्षेत्र लगभग 89,000 साल पहले बना था।

विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
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यह पहला मौका है जब गर्म ज्वालामुखीय पानी और ठंडी मीथेन गैस एक साथ इतनी नज़दीक मिली है।
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इससे समुद्री जीवन के चरम वातावरण में अस्तित्व के बारे में नई जानकारी मिल सकती है।
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यह पृथ्वी के अंदर मौजूद ऊर्जा प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगा।
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भविष्य में ऊर्जा संसाधनों (जैसे मीथेन हाइड्रेट्स) पर रिसर्च का मार्ग खुलेगा।
Robot in Pacific Ocean की यह खोज विज्ञान, भूविज्ञान और समुद्री तकनीक की दुनिया में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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निष्कर्ष — ख़तरनाक लेकिन ज्ञान से भरी खोज
जहाँ एक तरफ यह खोज बेहद डरावनी लग सकती है, वहीं दूसरी तरफ यह बताती है कि समुद्र की गहराइयों में अभी बहुत कुछ ऐसा छुपा है जिसके बारे में हम कल्पना भी नहीं कर सकते।
करम्बुसेल जैसे क्षेत्र भविष्य में पृथ्वी की उत्पत्ति, जीवन के विकास और समुद्री ऊर्जा की संभावनाओं पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
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