‘Stupid Bihari’ से Maithili Thakur youngest MLA तक: हिम्मत की कहानी

‘Stupid Bihari’ से Maithili Thakur youngest MLA तक: हिम्मत की कहानी

‘Stupid Bihari’ से Maithili Thakur youngest MLA तक: हिम्मत की कहानी
‘Stupid Bihari’ से Maithili Thakur youngest MLA तक: हिम्मत की कहानी

मिथिला की मिट्टी से उठी एक आवाज पहले घर-घर पहुंची, फिर दिलों में बसी और अब उसी आवाज ने विधानसभा तक रास्ता बना लिया। 25 साल की उम्र में आलिनगर सीट से जीतकर Maithili Thakur बिहार विधानसभा की सबसे युवा विधायक बन गई हैं। यह सिर्फ राजनीतिक जीत की कहानी नहीं है—यह उस लड़की की कहानी है जिसे कभी स्कूल में “Stupid Bihari” कहकर चिढ़ाया गया, जिसे सिंगिंग रियलिटी शोज़ ने बार-बार ठुकराया, और जिसके परिवार ने रियाज़ के लिए 10 साल में 17 बार घर बदले। आज वही लड़की लाखों-करोड़ों लोगों की उम्मीद और प्रेरणा है।

शुरुआत: मधुबनी से दिल्ली, सुर से सियासत तक

मधुबनी (बिहार) में 25 जुलाई 2000 को जन्मी Maithili Thakur का घर संगीत से भरा रहा। पिता रमेश ठाकुर शास्त्रीय गायन सिखाते, मां घर और बच्चों की दिनचर्या संभालतीं। बचपन में ही रियाज़ शुरू हो गया—घंटों की साधना, छोटी-छोटी स्टेज, लोक-भक्ति से लेकर शास्त्रीय तक हर रंग में मेहनत। बेहतर ट्रेनिंग के लिए परिवार दिल्ली आ गया, मगर शुरुआती साल आसान नहीं थे—अक्सर एक कमरा, साथ में रियाज़ और पड़ोसियों की आपत्ति। शोर की शिकायतें आतीं, तो परिवार पैकअप कर लेता। Maithili Thakur की मां के शब्दों में, “हमने 10 साल में 17 घर बदले, ताकि बच्चे बिना रुकावट रियाज़ कर सकें।” 2017 में दिल्ली के द्वारका में घर लिया गया और 2020 में साउंडप्रूफ अपार्टमेंट में शिफ्ट होकर यह संघर्ष थोड़ा आसान हुआ।

“स्टूपिड बिहारी” की चुभन और अकेलापन

स्कूल के दिनों में टैलेंट के बावजूद Maithili Thakur अक्सर अलग-थलग महसूस करतीं। प्राइवेट स्कूल में उनकी स्कॉलरशिप लगी, पर वहां पढ़ने वाली लड़कियों की दुनिया उनसे अलग थी—ट्रैवल प्लान, स्लीपओवर, ब्रांडेड चर्चे। वह कहती हैं, “मुझे हमउम्र लड़कियों से डर सा लगने लगा था। कोई भी बात कर देती—‘Stupid Bihari’—जैसे बिहारी होना कोई गाली हो।” दूर नजफगढ़ में रहने की बात भी बताने में उन्हें झिझक होती। यह अलगाव बाद में वही चीज़ बन गया जिसने उन्हें अपनी जड़ों पर और गर्व करना सिखाया—मिथिला की बोली, गीत और संस्कृति उनकी ताकत बनी।

रियेलिटी शोज़ के दरवाज़े—बार-बार बंद

करियर के शुरुआती मोड़ पर उन्होंने कई रियलिटी शोज़ में ट्राई किया। Sa Re Ga Ma Pa Lil Champs में क्लासिकल झुकाव की वजह से रिजेक्शन मिला। 2015 में इंडियन आइडल के ऑडिशन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह बताती हैं, “मैं रो-रोकर थक जाती थी। कई बार तो वजह भी नहीं बताते थे कि क्यों रिजेक्ट किया।” एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने ठान लिया कि “सिंगिंग छोड़कर UPSC की तैयारी कर लूंगी”—क्योंकि पढ़ाई में भी वे अच्छी थीं। लेकिन पिता ने कहा—क्लासिकल छोड़ना मत, यही तुम्हारी पहचान है।

Maithili Thakur
Maithili Thakur

टर्निंग पॉइंट: राइजिंग स्टार 2017 और अपना मंच

2017 में राइजिंग स्टार में पहुंचकर Maithili Thakur ने भक्ति/लोक रंग के गाने गाए। वह महज़ दो वोट से रनर-अप रहीं, मगर शो ने पहचान का दरवाज़ा खोल दिया। इसके बाद फिल्मी ऑफर्स की राह पकड़ने के बजाय उन्होंने अपना मंच खुद बनाने का फैसला किया—सोशल मीडिया। भाइयों अयाची और ऋषभ के साथ मिलकर लोक, भक्ति और शास्त्रीय रंगों वाले गानों के वीडियो पोस्ट करने शुरू किए। उनकी भाषा में सरलता और सुर में अपनापन था—वीडियो वायरल हुए और देखते-देखते वह डिजिटल युग की सांस्कृतिक आइकन बन गईं। आज उनके यूट्यूब/इंस्टाग्राम/फेसबुक पर मिलियन-में फॉलोअर्स हैं—एक ऐसी कम्युनिटी जो सिर्फ सुनती नहीं, जुड़ती भी है।

“इंडिपेंडेंट” रहने का फैसला

रिपोर्ट्स कहती हैं कि राइजिंग स्टार के बाद बड़े फिल्ममेकर्स के ऑफिस से कॉल आए, पर Maithili Thakur ने स्वतंत्र कलाकार की राह चुनी। उनके लिए “फेम” से ज्यादा ज़रूरी था—अपनी जड़ों का संगीत बिना समझौते के गाना। यही चुनाव आगे चलकर उनकी ताकत बना—ब्रांड्स, कॉन्सर्ट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने मिलकर उनके काम को स्थिरता दी।

चुनाव की राह: क्यों उतरीं पब्लिक लाइफ में?

अलिनगर के लोगों के बीच Maithili Thakur का चेहरा नया नहीं था—वो वर्षों से मिथिला की आवाज़ बन चुकी थीं। 2025 के विधानसभा चुनाव में BJP टिकट पर उन्होंने मैदान संभाला और 17 साल बाद पार्टी को इस क्षेत्र में जीत दिलाई। 25 की उम्र में सबसे युवा विधायक बनना सिर्फ उम्र का रिकॉर्ड नहीं—यह विश्वास का परिणाम है। उनकी कैंपेनिंग में दो बातें साफ रहीं—‘अपनी संस्कृति पर गर्व’ और ‘युवा आकांक्षाओं की भाषा’। सोशल मीडिया पर जो कनेक्ट उन्होंने बनाया था, वही ऑन-ग्राउंड ऊर्जा में बदल गया।

किन मुद्दों पर फोकस?

नई भूमिका में उनसे अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं—रोज़गार, सड़कों-नाली-जलग्रहण जैसी बेसिक सुविधाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य, साथ ही मिथिला की कला-भाषा के संरक्षण की ठोस पहल। बाढ़-प्रभावित इलाकों के लिये स्थायी समाधान, स्थानीय कलाकारों के लिए प्लेटफॉर्म, और स्किल/एजुकेशन को बेहतर करने के कार्यक्रम—ये सब उनके एजेंडा का हिस्सा बन सकते हैं। उनका फायदा यह है कि वह “कम्युनिकेशन-फर्स्ट” हैं—लोगों की बात सुनती हैं और ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों मोर्चों पर फीडबैक ले सकती हैं।

Maithili Thakur youngest MLA
Maithili Thakur youngest MLA

एक लड़की, कई सीखें

  • अपनी जड़ें छोड़ना नहीं: क्लासिकल-लोक से जुड़ी रहना उनके लिए रिस्क था, पर उसी ने पहचान दी।
  • रिजेक्शन अंत नहीं: बार-बार “न” सुनकर भी उन्होंने अपना मंच खुद बनाया।
  • मेहनत की कीमत: 17 घर बदलना सुनने में वजनदार किस्सा है—असल में वह अनुशासन और समर्पण की कीमत है।
  • ताने से ताकत तक: “बिहारी” को गाली बनाकर बोलने वालों को उन्होंने अपने काम से जवाब दिया—आज वही पहचान उनका गर्व है।
  • नई पीढ़ी की भाषा: डिजिटल माध्यमों से जुड़कर उन्होंने दिखाया कि संस्कृति और आधुनिकता साथ चल सकती हैं।

घर, परिवार और टीम—कंधे से कंधा

Maithili Thakur की यात्रा में परिवार एक स्थिर स्तंभ रहा—पिता का सख्त-पर-समझदार मार्गदर्शन, मां की धैर्यभरी देखरेख, और भाइयों का साथ। स्टेज पर तिकड़ी की केमिस्ट्री दिखती है; स्टेज के बाहर वही टीम उनके काम को सहज बनाती है—रिकॉर्डिंग, रीइल्स, शो प्लानिंग, हर चीज़ में परिवार साथ खड़ा है।

आज और कल

आज Maithili Thakur एक पहचान नहीं, एक भरोसा हैं—कि छोटे कस्बे, सीमित साधन और तानों के बीच भी सपने पूरे किए जा सकते हैं। संगीत उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, संवाद का पुल है—और अब राजनैतिक दायित्व उसी संवाद को नई अर्थवत्ता देता है। सबसे युवा विधायक होने का मतलब है—ऊर्जा और दृष्टि को साफ़ नीतियों में बदलना। आने वाले वर्षों में यह देखना रोचक होगा कि कैसे वह कला और जन-सेवा के बीच संतुलन बनाती हैं—और किस तरह मिथिला की आवाज़ को नीति के मंच तक पहुंचाती हैं।

 

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अंत में

Maithili Thakur की कहानी हमें यह भी सिखाती है कि “ट्रेंड” से बड़ा “ट्रूथ” होता है। अगर आपकी सच्चाई आवाज़ में है, मेहनत में है और इरादे में है, तो रास्ते बनते जाते हैं—कभी स्टेज पर, कभी सदन में। ‘स्टूपिड बिहारी’ का ताना सुनने वाली वही लड़की आज बिहार की सबसे युवा विधायक है। शायद यही एक पंक्ति उनकी पूरी यात्रा का सार है—जड़ों से जुड़े रहो, तब ही उड़ान दूर तक जाती है।

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