“नोरा फतेही जैसा फिगर चाहिए था पति को, पत्नी पर ढाए ताने… 3 घंटे जिम और भूखा रखने तक की पहुंची जुल्म की हद”

ज़रा सोचिए, एक नई नवेली दुल्हन… शादी की सारी खुशियाँ अभी पूरी तरह महसूस भी नहीं हुई होंगी कि उसके सामने एक ‘असली’ और ‘खतरनाक’ शर्त रख दी जाती है। “तुम्हारा फिगर नोरा फतेही जैसा होना चाहिए।” यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक युवती की real-life ट्रैजडी है।
उसका पति, जो खुद एक फिजिकल एजुकेशन टीचर है, यानी शारीरिक स्वास्थ्य के बारे में जानने वाला इंसान, उस पर रोजाना 3-3 घंटे जिम करने का दबाव डालता था। न पूरा वर्कआउट कर पाने पर खाना बंद कर देता था। ताने मारता, उसकी हाइट और खूबसूरती को ‘नॉर्मल’ बताकर उसे मानसिक रूप से तोड़ता रहा। यहाँ तक कि गर्भपात जैसी दर्दनाक घटना के बाद भी उसकी यातना खत्म नहीं हुई।

क्या वाकई सिर्फ जिम करके कोई सेलेब्रिटी जैसा बन सकता है?
यह सवाल दिमाग में आना लाजमी है। हम सभी की यही ख्वाहिश होती है कि हमारा पार्टनर सेलेब्रिटीज जैसा दिखे। पर क्या यह इतना आसान है? जवाब है – बिल्कुल नहीं।
सेलेब्रिटीज का फिटनेस का सफर हमें सिर्फ स्क्रीन पर दिखता है। उनके पास पर्सनल ट्रेनर्स, न्यूट्रिशनिस्ट, डाइटिशियन, और पूरी एक टीम होती है जो उनके खान-पान से लेकर वर्कआउट तक हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखती है। वे महंगे बॉडी ट्रीटमेंट, सर्जरीज और घंटों की मेहनत का सहारा लेते हैं। यह सब एक आम इंसान के बस की बात नहीं है।

तो फिर, एक आम इंसान के लिए कितनी एक्सरसाइज है ज़रूरी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दुनिया भर के हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एक स्वस्थ वयस्क के लिए हफ्ते में 150 मिनट की मध्यम (moderate) एक्सरसाइज काफी है। है ना हैरान करने वाली बात? मतलब, रोजाना सिर्फ 30 मिनट! अगर आप ज्यादा intense वर्कआउट जैसे दौड़ना, HIIT, तेज साइकिल चलाना करते हैं, तो हफ्ते के 75 मिनट भी पर्याप्त हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि एक्सरसाइज का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं है। बाजार तक पैदल चलकर जाना, ऑफिस में सीढ़ियाँ चढ़ना, बच्चों के साथ खेलना, घर की सफाई करना या बगीचे में काम करना – ये सभी चीजें शारीरिक गतिविधि में शामिल हैं। जरूरी है तो बस नियमितता।
कब बढ़ाना पड़ सकता है एक्सरसाइज का समय?
अगर आपका मकसद सिर्फ स्वस्थ रहना और दिल-दिमाग को दुरुस्त रखना है, तो 30 मिनट बहुत है। लेकिन अगर आप विशेष रूप से वजन कम करना चाहते हैं या मसल्स बनाना चाहते हैं, तो समय बढ़ाना पड़ सकता है। मसलन:
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वजन घटाने के लिए: रोजाना 45-60 मिनट की कार्डियो एक्सरसाइज।
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मसल्स बनाने के लिए: हफ्ते में 3-4 दिन, 45-60 मिनट की वेट ट्रेनिंग।
पर ध्यान रहे, इसमें भी डाइट और पर्याप्त आराम का रोल सबसे अहम है। बिना सही खान-पान और नींद के घंटों पसीना बहाना भी बेकार है।
असली मुद्दा है ‘बॉडी शेमिंग’ और ‘अवास्तविक उम्मीदें’
ये केस सिर्फ एक पति की हिंसा की कहानी नहीं है, बल्कि उस सामाजिक सोच की परतें खोलता है जहाँ:
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सेलेब्रिटी कल्चर को Reality समझ लिया जाता है: सोशल मीडिया और फिल्मों में दिखने वाली ‘परफेक्ट बॉडी’ अक्सर एंगल्स, मेकअप, लाइटिंग और एडिटिंग का नतीजा होती है। उसे वास्तविकता मान लेना एक भूल है।
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पार्टनर को अपनी ‘प्रॉपर्टी’ समझना: किसी इंसान से उसकी बॉडी के आधार पर प्यार करना या उसे बदलने की जिद करना, दरअसल उस इंसान को इज्जत न देना है। यह relationship नहीं, ownership की सोच है।
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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी: 3 घंटे की जबरदस्ती की एक्सरसाइज और भूखा रखना, सेहत को सुधारने का नहीं, बर्बाद करने का तरीका है। इससे महिला का मिसकैरेज होना इसका सबसे दुखद और गंभीर परिणाम है।

सबक और सावधानी
इस दुखद घटना से हमें कुछ जरूरी बातें सीखनी चाहिए:
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स्वास्थ्य सबसे पहले: फिटनेस का मतलब सिर्फ पतला या सिक्स-पैक एब्स वाला body नहीं है। फिटनेस का मतलब है सेहतमंद, एनर्जेटिक और खुश रहना।
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Realistic Goals बनाएँ: किसी और की बॉडी को टारगेट बनाने के बजाय, अपने शरीर के हिसाब से achievable goals सेट करें।
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बातचीत है जरूरी: रिश्ते में अगर कोई बात अच्छी नहीं लग रही है, तो उसे communicate जरूर करें। मनमुटाव या ताने relationship को अंदर ही अंदर खोखला कर देते हैं।
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मदद लेने से न घबराएँ: अगर आपके साथ या आपके आस-पास किसी के साथ ऐसा ही कुछ हो रहा है, तो चुप न रहें। परिवार, दोस्तों या फिर authorities की मदद लें।
निष्कर्ष: नोरा फतेही या कोई भी सेलेब्रिटी अपनी मेहनत और resources से fit हैं, यह प्रेरणा लेने की बात है, न कि किसी पर थोपने की। एक healthy relationship में पार्टनर एक-दूसरे की बॉडी को सिर्फ accept ही नहीं करते, बल्कि उससे प्यार करते हैं। खुद को या किसी और को उसके शरीर के लिए शर्मिंदा करना, किसी भी सभ्य समाज में जगह नहीं रखता। ये मामला सिर्फ एक case study नहीं, बल्कि हम सभी के लिए एक आईना है।
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डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
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आत्मविश्वास का इससे कोई लेना-देना नहीं
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