AI Ranking 2025: दुनिया की AI महाशक्ति बनने की दौड़ में भारत ने पकड़ी तेज रफ्तार, अब टॉप-3 में जगह!

दुनिया की आर्थिक और तकनीकी ताकत अब Artificial Intelligence (AI) के इर्द-गिर्द घूम रही है। ऐसे में हर देश इस नई दौड़ में आगे निकलना चाहता है। सवाल यह है कि असल में कौन सा देश जीत रहा है? स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ह्यूमन-सेंटर्ड AI इंस्टीट्यूट (HAI) के ताजा ‘ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल’ ने इस सवाल का जवाब दे दिया है। इसकी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की तीसरी सबसे ‘वाइब्रेंट’ यानी जीवंत AI इकोसिस्टम वाला देश बन गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारत ने सिर्फ एक साल में ही अपनी रैंकिंग सातवें स्थान से छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंचा दी है।
इस AI Ranking 2025 की बात करें तो अमेरिका 78.6 के स्कोर के साथ पहले नंबर पर काबिज है। उसके बाद चीन 36.95 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर है। और भारत ने 21.59 के स्कोर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। भारत ने दक्षिण कोरिया (17.24), ब्रिटेन (16.64) और सिंगापुर (16.43) जैसे देशों को पीछे छोड़ा है।

सिर्फ रिसर्च नहीं, यह 7 पैमानों पर होती है कसौटी
यह रैंकिंग सिर्फ AI मॉडल बनाने या रिसर्च पेपर छापने भर से तय नहीं होती। स्टैनफोर्ड का यह टूल किसी देश की AI ताकत को समग्र रूप से मापता है। इसके लिए सात मुख्य स्तंभ तय किए गए हैं:
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रिसर्च एंड डेवलपमेंट (शोध और विकास)
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इकोनॉमिक कॉम्पिटिटिवनेस (आर्थिक प्रतिस्पर्धा)
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टैलेंट (कुशल जनशक्ति)
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इन्फ्रास्ट्रक्चर (आधारभूत ढांचा)
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पॉलिसी एंड गवर्नेंस (नीति और शासन)
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पब्लिक ओपिनियन (जनता की राय)
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रिस्पॉन्सिबल AI (जिम्मेदार AI)
इन्हीं सातों पैमानों पर देशों के प्रदर्शन को जोड़कर ‘AI वाइब्रेंसी’ का अंतिम स्कोर तैयार किया जाता है। यही कारण है कि यह रिपोर्ट दुनिया भर की सरकारों, कंपनियों और शोधकर्ताओं के लिए एक विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है।
भारत की सफलता के पीछे क्या हैं राज?
भारत का तीसरे स्थान पर पहुंचना कोई संयोग नहीं है। इसके पीछे कई मजबूत वजहें हैं:
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बड़ी छलांग: 2023 में भारत इस सूची में सातवें स्थान पर था। 2024 में वह सीधे तीसरे स्थान पर पहुंच गया, जो एक बेहद तेज प्रगति को दर्शाता है।
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आर्थिक मजबूती और स्टार्टअप कल्चर: रिपोर्ट में भारत की ‘इनोवेशन इंडेक्स’ और ‘इकोनॉमिक कॉम्पिटिटिवनेस’ में मजबूत स्कोर की बात कही गई है। यानी, देश में नए AI स्टार्टअप, उद्यम पूंजी निवेश और व्यापारिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
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कुशल टैलेंट का भंडार: देश में इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा से निकलने वाली प्रतिभाओं की एक विशाल फौज है, जो दुनिया भर में AI के विकास में योगदान दे रही है।
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सरकारी फोकस: भारत सरकार की ‘AI फॉर ऑल’ जैसी पहल और इस क्षेत्र में नीतिगत ध्यान ने भी इकोसिस्टम को मजबूती दी है।
दुनिया का AI लैंडस्केप: अमेरिका की बादशाहत, चीन का दबदबा
रिपोर्ट से साफ है कि AI की दुनिया में अमेरिका की बादशाहत अभी बरकरार है। वह न केवल सबसे ज्यादा निवेश ($109.1 बिलियन) आकर्षित कर रहा है, बल्कि 2024 में दुनिया के 40 उल्लेखनीय AI मॉडल भी अमेरिका से ही आए। गूगल के ‘जेमिनी 2.0’ जैसे मॉडल इसकी मिसाल हैं।
हालांकि, चीन तेजी से इस अंतर को कम कर रहा है। वह AI रिसर्च पेपर और पेटेंट के मामले में दुनिया में अव्वल है। बाइडू के ‘अपोलो गो’ रोबोटैक्सी जैसे प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि चीन AI को रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी तेजी से शामिल कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि AI को लेकर जनता का उत्साह चीन (83%) और इंडोनेशिया (80%) जैसे देशों में अमेरिका (39%) या कनाडा (40%) के मुकाबले कहीं ज्यादा है।

निष्कर्ष: एक नई शुरुआत
भारत का तीसरे स्थान पर पहुंचना निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि और गर्व का विषय है। यह देश के युवाओं, उद्यमियों और नीति-निर्माताओं के सामूहिक प्रयास का नतीजा है। हालांकि, अमेरिका और चीन के स्कोर के सामने अभी लंबी दूरी तय करनी है। भविष्य की चुनौती शोध की गुणवत्ता, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और जिम्मेदार AI के मानकों को और मजबूत करने की होगी। स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट एक चेतावनी भी देती है कि AI के फायदे अगर समान रूप से नहीं बंटे, तो दुनिया में अमीरी-गरीबी का फासला और बढ़ सकता है। भारत के लिए यह स्थिति एक मौका है कि वह न सिर्फ AI का एक बड़ा उपयोगकर्ता बने, बल्कि दुनिया के लिए नैतिक और समावेशी AI समाधान भी तैयार करे।
𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚’𝐬 𝐭𝐞𝐜𝐡 𝐫𝐞𝐯𝐨𝐥𝐮𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐢𝐧 𝐦𝐨𝐭𝐢𝐨𝐧. 🖥️
India’s meteoric rise in global AI rankings signals a powerful shift, leaping from 7th place in 2023 to 3rd by 2024, overtaking nations like South Korea and the UK. 📈
With impressive scores in research,… pic.twitter.com/SsOjQIoHUL
— BJP (@BJP4India) December 15, 2025
Disclaimer:
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यह लेख स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ह्यूमन-सेंटर्ड एआई इंस्टीट्यूट (HAI) द्वारा जारी “ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल” की 2025 की रिपोर्ट पर आधारित एक सूचनात्मक और विश्लेषणात्मक सामग्री है।
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रिपोर्ट में प्रस्तुत रैंकिंग और आंकड़े एक विशिष्ट समय पर और निर्धारित मापदंडों (रिसर्च, इकोनॉमिक कॉम्पिटिटिवनेस, टैलेंट आदि) के आधार पर तैयार किए गए हैं। ये गतिशील (Dynamic) हैं और भविष्य में बदल सकते हैं।
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एआई का क्षेत्र अत्यंत तेज़ी से विकसित हो रहा है। अतः नीतियों, निवेश और तकनीकी प्रगति के नए आंकड़े आने पर देशों की स्थिति में परिवर्तन संभव है।
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लेख का उद्देश्य पाठकों को वर्तमान वैश्विक एआई परिदृश्य की एक सामान्य जानकारी देना है। किसी भी निवेश, शोध या नीतिगत निर्णय के लिए रिपोर्ट के मूल दस्तावेज़ और अन्य प्रामाणिक स्रोतों से सीधे जानकारी सत्यापित करने की सलाह दी जाती है।
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लेख में व्यक्त कुछ विचार और भविष्य के अनुमान लेखक के विश्लेषण पर आधारित हैं।
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