अमेरिका से पहले चीन ने अंतरिक्ष में भेजी AI Satellite, 2026 में बनने वाला है ‘स्पेस सुपरकंप्यूटर’

अमेरिका से पहले चीन ने अंतरिक्ष में भेजी AI Satellite, 2026 में बनने वाला है ‘स्पेस सुपरकंप्यूटर’

अमेरिका से पहले चीन ने अंतरिक्ष में भेजी AI Satellite, 2026 में बनने वाला है ‘स्पेस सुपरकंप्यूटर’
अमेरिका से पहले चीन ने अंतरिक्ष में भेजी AI Satellite, 2026 में बनने वाला है ‘स्पेस सुपरकंप्यूटर’

चीन ने अंतरिक्ष में Artificial Intelligence (AI) की दुनिया में एक बड़ा कदम उठाया है। जिस AI Satellite को लेकर अमेरिका अपनी तकनीक का दावा कर रहा था, उससे पहले ही चीन यह काम पूरा कर चुका है। अमेरिका की एक कंपनी स्टारक्लाउड ने नवंबर 2025 में स्पेसएक्स के जरिए NVIDIA H100 चिप वाली सैटेलाइट भेजी, लेकिन तब तक चीन लगभग एक साल पहले ही AI Satellite लॉन्च कर चुका था।
अब इस उपलब्धि से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं।


चीन की AI Satellite: क्या खास है ‘डोंगफांग हुईयान गाओफेन 01’ में?

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने दिसंबर 2024 में अपनी पहली AI-Powered Satellite डोंगफांग हुईयान गाओफेन 01 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा था।
इसमें एक खास AI मॉडल लगाया गया है—JigonGPT, जो तस्वीरों को सिर्फ पहचानता ही नहीं बल्कि उन्हें समझ सकता है और जरूरत पड़ने पर नई इमेज भी जेनरेट कर सकता है।

यानी यह AI सीधे अंतरिक्ष में बैठकर फैसले लेने की क्षमता रखता है—यह आज की तकनीक से बिल्कुल अलग स्तर की उपलब्धि है।

सैटेलाइट से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक हान यिन्हे ने दावा किया कि
“हमने साबित कर दिया कि जेनरेटिव AI को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है।”


AI Satellite
AI Satellite

सैटेलाइट से बना डिजिटल ह्यूमन—जो सीधे बात करता है

इस सैटेलाइट की एक दिलचस्प उपलब्धि यह भी है कि इससे एक डिजिटल ह्यूमन मॉडल बनाया गया है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर उपयोगकर्ताओं से बात कर सकता है।
डेटा जमीन पर लौटकर नहीं आता, इसलिए जवाब बहुत तेजी से मिलते हैं। यह दिखाता है कि भविष्य में AI मॉडल्स का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष में शिफ्ट हो सकता है, जहां वे बिजली, तापमान और वजन जैसे फायदे के साथ बेहतर काम करेंगे।


अमेरिका के आरोप और चीन की प्रतिक्रिया

अमेरिका का दावा है कि चीन कई तकनीकों में पीछे है क्योंकि उसे शक्तिशाली चिप्स उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि चीन ने इस आरोप का जवाब देते हुए बताया कि—

  • अमेरिका ने हाई-एंड GPU की सप्लाई रोक दी

  • इसलिए चीन ने अपना GPU सिस्टम खुद बनाया

  • कई GPU को जोड़कर एक नया स्पेस कंप्यूटिंग मॉडल तैयार किया

  • गर्मी और ऊर्जा के उपयोग की मुश्किलें भी हल कर लीं

चीन का फोकस भविष्य में ऐसे प्लेटफॉर्म बनाने पर है जो अंतरिक्ष में ही बड़े AI मॉडल चला सकें।


AI Satellite क्यों जरूरी है अंतरिक्ष में AI?

आज की सैटेलाइटें पहले तस्वीरें लेती हैं, फिर डेटा धरती पर भेजती हैं, और फिर प्रोसेसिंग होती है।
इस प्रक्रिया में समय लगता है—कभी-कभी घंटों।

हान यिन्हे बताते हैं:
“अगर बाढ़ या भूकंप की स्थिति हो, तो मिनटों की देरी से भी नुकसान बढ़ सकता है।
अंतरिक्ष में AI होने से फैसला कुछ ही सेकंड में लिया जा सकेगा।”

इससे कई काम तेज हो सकते हैं—

  • प्राकृतिक आपदा चेतावनी

  • रियल-टाइम निगरानी

  • मौसम का सटीक अनुमान

  • समुद्री गतिविधियों पर नजर

  • फसल और पर्यावरण अध्ययन

चीन का कहना है कि वह इस तकनीक को अन्य देशों के साथ भी साझा करने के लिए तैयार है।


2026: अंतरिक्ष में बन सकता है ‘स्पेस सुपरकंप्यूटिंग सेंटर’

चीन अब इससे भी बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।
2026 में वह ऐसी सैटेलाइट भेजने वाला है जिसमें—

  • कई GPU एक साथ काम करेंगे

  • पूरा सुपरकंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म अंतरिक्ष में मौजूद होगा

  • नई, मजबूत और स्पेस-प्रूफ चिप तैयार की जाएगी

यानी भविष्य में सुपरकंप्यूटर धरती पर नहीं, बल्कि सीधे अंतरिक्ष में होंगे।

AI Satellite
AI Satellite

स्पेस AI की रेस — कौन आगे?

अमेरिका भी इस दौड़ में है, और एलन मस्क के मुताबिक आने वाले वर्षों में स्टारलिंक के जरिए स्पेस डेटा सेंटर बनाए जाएंगे।
लेकिन फिलहाल चीन एक कदम आगे माना जा रहा है, क्योंकि उसने यह तकनीक पहले ही लागू कर दी है।

AI Satellite, अंतरिक्ष में AI की यह जंग आने वाले समय में हर देश की तकनीक, सुरक्षा और डेटा क्षमता को नई दिशा देने वाली है।

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