सोने की ‘गुप्त’ खरीदारी: चीन-अमेरिका देखते रह गए, इस एक देश ने खरीद लिया आधा सोना! जानें क्यों दुनिया भर में मची है होड़

सोने को लेकर दुनिया में एक अजीब सी होड़ मची हुई है। एक तरफ आम आदमी बढ़ती कीमतों से परेशान है, तो दूसरी तरफ दुनिया के बड़े-बड़े देशों के केंद्रीय बैंक इसे चुपचाप अपने खजाने में भर रहे हैं। यह कोई एक-दो महीने की बात नहीं, बल्कि पिछले दो सालों से यही कहानी चल रही है। सोने की चमक इतनी बढ़ गई है कि इस साल ही इसकी कीमतें 40 से ज्यादा बार अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
लेकिन हाल ही में अगस्त के महीने में कुछ ऐसा हुआ, जिसने दुनिया के बड़े-बड़े आर्थिक विशेषज्ञों को भी चौंका दिया। इस महीने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने मिलकर कुल 15 टन सोना खरीदा। पर हैरानी की बात यह है कि इस खरीदारी का आधे से ज्यादा हिस्सा, यानी करीब 8 टन सोना, किसी एक ही देश ने खरीद लिया। और वो देश न तो अमेरिका है, न चीन और न ही रूस। उस देश का नाम है कजाकिस्तान!
यह नाम सुनकर शायद आप भी चौंक गए होंगे, लेकिन यह सच है। मध्य एशिया के इस देश ने दुनिया के बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ी सोने की खरीदारी की है। इस खरीदारी के बाद कजाकिस्तान का कुल स्वर्ण भंडार 308 टन हो गया है।
🥇 कज़ाखस्तान का दबदबा
अगस्त में सोना खरीदने वाले देशों में National Bank of Kazakhstan ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई — उन्होंने अकेले लगभग 8 टन सोना खरीदा, जो कुल खरीद का आधे से अधिक हिस्सा है।
इस कदम से कज़ाखस्तान के गोल्ड रिजर्व अब लगभग 316 टन पहुँच गए हैं।
अन्य देशों में, तुर्की, चीन और बुल्गारिया ने भी लगभग 2-2 टन सोना जोड़ा।
चीन भी नहीं है पीछे, बना रहा है अपना रिकॉर्ड
सोने की इस रेस में चीन भी किसी से कम नहीं है। अगस्त में चीन के केंद्रीय बैंक ने भी 2 टन सोना खरीदा। यह सुनने में भले ही कजाकिस्तान से कम लगे, लेकिन चीन यह काम लगातार दसवें महीने से कर रहा है। इस लगातार खरीदारी के चलते चीन का कुल स्वर्ण भंडार पहली बार 2,300 टन के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। चीन चुपचाप, लेकिन लगातार अपने सोने के भंडार को मजबूत कर रहा है। चीन के अलावा तुर्की और बुल्गारिया जैसे देशों ने भी 2-2 टन सोने की खरीदारी की है।

आखिर क्यों मची है सोना खरीदने की यह होड़?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ये देश इतना सोना खरीद क्यों रहे हैं? इसका जवाब छिपा है दुनिया की बदलती आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में।
दरअसल, अब तक दुनिया का ज्यादातर व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता आया है। डॉलर को सबसे सुरक्षित माना जाता था। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस के डॉलर भंडार को फ्रीज कर दिया, तब दुनिया के बाकी देशों को एक झटका लगा। उन्हें समझ आ गया कि डॉलर पर पूरी तरह से निर्भर रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
इसे ऐसे समझिए कि दुनिया के सारे देश अब अपना पैसा सिर्फ एक बैंक (अमेरिकी डॉलर) में नहीं रखना चाहते। वे एक सुरक्षित विकल्प ढूंढ रहे हैं, और सोना सदियों से सबसे भरोसेमंद विकल्प रहा है। सोना एक भौतिक संपत्ति है, जिसे कोई देश एक बटन दबाकर फ्रीज नहीं कर सकता। यह किसी भी राजनीतिक संकट या आर्थिक मंदी में सुरक्षा की गारंटी देता है। इसी प्रक्रिया को ‘डी-डॉलराइजेशन’ (De-dollarization) कहा जा रहा है, और सोने की यह खरीदारी उसी का एक बड़ा हिस्सा है।
अगस्त 2025 के प्रमुख खरीदार और विक्रेता
आइए एक नजर डालते हैं कि अगस्त महीने में किस देश ने कितने सोने की खरीदारी की और किसने बेचा .
| देश / केंद्रीय बैंक | अगस्त 2025 में खरीद/बिक्री (टन में) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| कजाकिस्तान | +8 टन | लगातार छठा महीना खरीदारी |
| बुल्गारिया | +2 टन | जून 1997 के बाद सबसे बड़ी खरीद |
| तुर्की | +2 टन | आधिकारिक रिजर्व 639 टन पर |
| चीन | +2 टन | लगातार दसवां महीना खरीदारी; रिजर्व 2,300 टन पार |
| उज्बेकिस्तान | +2 टन | कुल भंडार 366 टन |
| चेक रिपब्लिक | +2 टन | लगातार 30वां महीना खरीदारी; लक्ष्य 2028 तक 100 टन |
| रूस | -3 टन | सिक्का ढलाई कार्यक्रम से जुड़ी बिक्री |
💰 सोने में तेजी के पीछे के प्रमुख कारण
दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना जमा करने के पीछे कई गहरे कारण हैं:
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भू-राजनीतिक तनाव: रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में संघर्ष और अमेरिका-चीन के बीच तनाव ने केंद्रीय बैंकों को एक सुरक्षित hedge की तलाश में सोने की ओर रुख करने पर मजबूर किया है .
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अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना: कई देश अब अमेरिकी डॉलर में over-exposure के जोखिम को कम करना चाहते हैं। सोना उन्हें अपने रिजर्व को diversify करने में मदद कर रहा है .
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मुद्रास्फीति की चिंता: सोना लंबे समय से inflation के दौर में wealth को preserve करने का एक भरोसेमंद जरिया रहा है .
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ब्याज दरों में बदलाव: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी सोने को आकर्षक बना रही हैं, क्योंकि कम ब्याज दरों के दौर में non-yielding asset जैसे सोने का आकर्षण बढ़ जाता है .
दुनिया में सोने का असली बादशाह कौन?
भले ही चीन और दूसरे देश तेजी से सोना खरीद रहे हों, लेकिन इस खेल का असली बादशाह आज भी अमेरिका ही है। अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा 8,133 टन का स्वर्ण भंडार है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले 25-30 सालों में अमेरिका ने अपने सोने के भंडार में कोई खास बदलाव नहीं किया है।
दुनिया के टॉप 10 देश (सोने के भंडार में):
- अमेरिका: 8,133 टन
- जर्मनी: 3,350 टन
- इटली: 2,452 टन
- फ्रांस: 2,437 टन
- रूस: 2,330 टन
- चीन: 2,301 टन
- स्विट्जरलैंड: 1,040 टन
- भारत: 880 टन
- जापान: 846 टन
- तुर्की: 837 टन
इस लिस्ट में भारत कहाँ है?
इस लिस्ट में भारत आठवें स्थान पर है और हमारे देश का रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी धीरे-धीरे सोने की खरीदारी बढ़ा रहा है। भारत के पास वर्तमान में लगभग 880 टन सोना है। यह हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान (लगभग 64 टन) के मुकाबले 14 गुना से भी ज्यादा है। असल में, भारत की सिर्फ एक बड़ी कंपनी के पास इससे कहीं ज्यादा सोना हो सकता है। यह दिखाता है कि आर्थिक सुरक्षा के मामले में भारत एक मजबूत स्थिति में है।

लेकिन असली कहानी तो कुछ और है! भारत है सोने का ‘अघोषित’ बादशाह
अभी तक हमने जो भी बात की, वो सिर्फ सरकारी खजानों यानी केंद्रीय बैंकों के सोने के भंडार की है। लेकिन अगर हम भारत की पूरी ताकत को देखें, तो तस्वीर पूरी तरह से बदल जाती है। असली कहानी भारत के आम घरों, मंदिरों और परिवारों में छिपी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) के अनुमानों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के पास सामूहिक रूप से लगभग 25,000 टन से भी ज्यादा सोना है! यह सोना हमारी दादी-नानी की तिजोरियों में, मंदिरों के खजानों में और हमारी संस्कृति के हिस्से के रूप में पीढ़ियों से जमा है। अब जरा सोचिए, अगर हम सरकार के 880 टन सोने में इस 25,000 टन को जोड़ दें, तो भारत का कुल सोना भंडार लगभग 26,000 टन के पार पहुंच जाता है। यह आंकड़ा अमेरिका के कुल 8,133 टन के आधिकारिक भंडार से तीन गुना से भी ज्यादा है! इस हिसाब से देखें तो, सरकारी आंकड़ों से परे, भारत असल में सोने की दुनिया का सबसे बड़ा ‘अघोषित’ बादशाह है। यह सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, विश्वास और आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक है।
Following a pause in July, central banks returned to buying in August by adding a net 15t of gold to global reserves. @KrishanGopaul explores the data in his latest blog. https://t.co/JHJa9Orn8H
— World Gold Council (@GOLDCOUNCIL) October 3, 2025
कुल मिलाकर, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की यह खरीदारी सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की अनिश्चितताओं के खिलाफ एक बीमा पॉलिसी है। यह ट्रेंड आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दिखना तय है।
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