Black Friday Sale 2025: अमेरिकी त्योहार को भारतीयों ने क्यों बना लिया अपना? FOMO और इन्फ्लुएंसर्स का खेल समझो

यार, जरा अपना फोन उठाओ और इंस्टाग्राम या फेसबुक खोलो। क्या दिख रहा है? हर तरफ “Black Friday Sale”, “50% Off”, “Limited Time Offer” के बैनर। ऐसा लग रहा है जैसे पूरी दुनिया शॉपिंग के पागलपन में डूब गई है। और भाई, भारत भी इस पागलपन में पीछे नहीं है!
Black Friday Sale है क्या बला?
चलो पहले थोड़ा इतिहास जान लेते हैं। ब्लैक फ्राइडे की शुरुआत 1960 के दशक में अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर से हुई थी। थैंक्सगिविंग के अगले दिन, यानी नवंबर के चौथे गुरुवार के बाद वाले शुक्रवार को, लोग क्रिसमस की शॉपिंग शुरू करते थे। दुकानदारों के लिए ये साल का सबसे फायदे वाला दिन होता था, इसीलिए इसे “ब्लैक” फ्राइडे कहा गया – क्योंकि इस दिन उनका हिसाब-किताब घाटे (रेड) से फायदे (ब्लैक) में आ जाता था।
अब सवाल ये है कि भारत में न थैंक्सगिविंग मनाते हैं, न क्रिसमस हमारा मेन फेस्टिवल है, फिर भी ब्लैक फ्राइडे का इतना क्रेज क्यों?
भारत में Black Friday Sale का जादू कैसे चला?
देखो भाई, इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं जो समझना जरूरी है।
पहली वजह: ग्लोबल ब्रांड्स और इंटरनेट का कॉम्बो
जब विदेशी ब्रांड्स भारत आए तो अपने साथ अपना डिस्काउंट कैलेंडर भी लाए। Amazon, Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स ने इसे और हवा दी। फिर जब सोशल मीडिया का बूम आया, तो ब्लैक फ्राइडे अचानक “साल की सबसे बड़ी सेल” बन गई।
आज हर छोटा-बड़ा ब्रांड इस बैंडवैगन पर चढ़ना चाहता है। लग्जरी ब्रांड हो या घर में बना स्किनकेयर प्रोडक्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स हो या मोमबत्तियां – सब ब्लैक फ्राइडे का टैग लगाकर बेच रहे हैं।
दूसरी वजह: FOMO – फियर ऑफ मिसिंग आउट
ये सबसे खतरनाक चीज है भाई। “सिर्फ आज के लिए”, “बस 3 पीस बचे हैं”, “मिडनाइट तक 70% ऑफ” – ऐसे मैसेज देखकर दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है। लगता है कि अगर अभी नहीं खरीदा तो जिंदगी का सबसे बड़ा मौका हाथ से निकल जाएगा।
दिल्ली की काउंसलर रूचि रूह बताती हैं कि “आज के विज्ञापन इतने पर्सनलाइज्ड हो गए हैं कि आपका फोन आपसे बेहतर जानता है कि आपको क्या पसंद है। और वही ऑफर्स बार-बार दिखाई देते हैं।”
नतीजा? तुम एक चीज खरीदने गए थे, लेकिन कार्ट में पांच चीजें पड़ी हैं। क्योंकि हर चीज पर “Limited Time Offer” का टैग लगा है।
तीसरी वजह: इन्फ्लुएंसर्स का जाल
भाई, ये सबसे बड़ा खेल है। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इन्फ्लुएंसर्स की “Haul Videos”, “Must-Buy List”, “Best Deals” वाली रील्स देखकर लगता है कि ये सब चीजें तो हमें भी चाहिए।
स्किनकेयर से लेकर टेक गैजेट्स तक, कैंडल्स से लेकर फैशन तक – हर चीज अचानक जरूरी लगने लगती है। जितना ज्यादा स्क्रोल करोगे, उतनी ज्यादा डील्स दिखेंगी। और जितनी ज्यादा डील्स दिखेंगी, उतना ज्यादा खरीदने का मन करेगा। ये एक चक्र है जिसमें फंसना बहुत आसान है।

ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा भी है!
एक और बात जो ध्यान देने वाली है – Black Friday Sale के दौरान ऑनलाइन ठगी और डिजिटल फ्रॉड का खतरा भी बढ़ जाता है। नकली वेबसाइट्स, फिशिंग लिंक्स और फेक ऑफर्स के जरिए स्कैमर्स लोगों को चूना लगाते हैं। तो शॉपिंग करो, लेकिन सावधानी से।
स्मार्ट शॉपिंग के टिप्स
अब ये मत समझो कि मैं कह रहा हूं कि शॉपिंग मत करो। करो, लेकिन समझदारी से। कुछ आसान टिप्स हैं:
बजट पहले तय करो: शॉपिंग शुरू करने से पहले तय कर लो कि कितना खर्च करना है। उससे ज्यादा मत जाओ, चाहे कितनी भी अच्छी डील हो।
कार्ट में डालो, बाद में देखो: कोई चीज पसंद आए तो तुरंत मत खरीदो। कार्ट में डालो और एक-दो घंटे बाद सोचो कि सच में जरूरत है या नहीं।
रात को स्क्रोल करने से बचो: भाई, रात के 2 बजे जो शॉपिंग होती है, वो सबसे खतरनाक होती है। नींद में आदमी कुछ भी खरीद लेता है।
इन्फ्लुएंसर्स को म्यूट करो: जो लोग बार-बार “Buy Now” वाली रील्स डालते हैं, उन्हें थोड़े दिन के लिए म्यूट कर दो।
घर में क्या है, पहले देखो: कई बार हमारे पास चीजें होती हैं, लेकिन हम भूल जाते हैं और वही चीज दोबारा खरीद लेते हैं।
लिस्ट बनाकर खरीदो: जो चाहिए उसकी लिस्ट बनाओ और उसी के हिसाब से खरीदो। बाकी सब इग्नोर करो।
क्या खत्म होगा ये क्रेज?
सच बताऊं तो जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। Black Friday Sale अब सिर्फ एक सेल नहीं रहा, ये एक कल्चर बन चुका है। FOMO, ग्लोबलाइजेशन, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और मनोवैज्ञानिक ट्रिक्स – सब मिलकर इसे और बड़ा बना रहे हैं।
लेकिन अगर हम इन ट्रिगर्स को समझ लें, तो शॉपिंग का मजा भी रहेगा और जेब भी सलामत रहेगी। तो इस Black Friday, खरीदो लेकिन होशियारी से!
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