Avadhut Sathe SEBI Ban: 546 करोड़ लौटाने का आदेश, कोर्स के नाम पर चली निवेश सलाह की दुकान

Stock market influencer Avadhut Sathe: ‘ट्रेनिंग’ के नाम पर क्या हुआ था धंधा?
सोशल मीडिया और YouTube पर ‘स्टॉक मार्केट गुरु’ बनकर उभरे कई लोगों को अक्सर हम फॉलो करते हैं, उनकी सलाह पर भरोसा करते हैं। लेकिन क्या हो अगर यह पता चले कि जिसे आप गुरु मान रहे हैं, वह बिना किसी कानूनी मंजूरी के आपसे करोड़ों रुपये वसूल रहा है? कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है Stock market influencer Avadhut Sathe के साथ। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने उन पर बैन लगाते हुए 546 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने का कड़ा आदेश दिया है। यह सिर्फ एक आदेश नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है।
Avadhut Sathe कौन हैं और कैसे बने ‘गुरु’?
Avadhut Sathe एक इंजीनियर हैं, जिन्होंने विदेश में नौकरी करने के बाद 2008 के आसपास शेयर बाजार में हाथ आजमाया। अपनी सफलता के किस्से बताते हुए उन्होंने धीरे-धीरे ‘Avadhut Sathe Trading Academy’ नाम से एक संस्थान खोला। यह संस्थान देश के कई शहरों में फैला और उनके YouTube चैनल, सेमिनारों ने हजारों लोगों को आकर्षित किया। वे एक चर्चित stock market influencer बन गए, जो लोगों को ‘फाइनेंशियल फ्रीडम’ का सपना दिखाते थे।

‘कोर्स’ के पैकेज में मिलते थे ‘शेयर टिप्स’
SEBI की लंबी जांच में पता चला कि यह सब एक पूरी तरह से प्लान किया गया धंधा था। Avadhut Sathe और उनकी कंपनी ASTAPL ने ‘ट्रेनिंग प्रोग्राम’ और ‘कोर्सेज’ के नाम पर लाखों लोगों से पैसा इकट्ठा किया। लेकिन असल में, ये कोर्स सिर्फ एक ‘कवर’ थे। इन कोर्स के अंदर, सदस्यों को सीधे शेयर खरीदने-बेचने की सलाह (‘टिप्स’) दी जाती थी। उन्हें लाइव मार्केट में क्या खरीदना है, क्या बेचना है, यह बताया जाता था। कुछ प्रोग्राम तो ऐसे थे, जहां सीधे कहा जाता था कि ‘हम आपको ट्रेड के सिग्नल देंगे’।
यहीं पर समस्या शुरू हुई। भारत में, अगर कोई पैसे लेकर निवेश की सलाह देता है या रिसर्च एनालिस्ट का काम करता है, तो उसके लिए SEBI के पास रजिस्टर्ड होना जरूरी है। यह नियम निवेशकों की सुरक्षा के लिए बने हैं। SEBI ने पाया कि Avadhut Sathe और उनकी एकेडमी के पास ऐसा कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था। मतलब, वे कानूनन ऐसी सेवाएं दे ही नहीं सकते थे।
3.37 लाख लोग, 600 करोड़ रुपये और SEBI का ऐतिहासिक आदेश
जांच के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। करीब 3.37 लाख लोगों से 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा की गई। SEBI ने इनमें से 546 करोड़ रुपये को ‘अवैध तरीके से कमाया गया मुनाफा’ माना है। बोर्ड ने साफ कहा है कि यह पैसा बिना रजिस्ट्रेशन के इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सेवाएं देकर कमाया गया, इसलिए इसे वापस किया जाना चाहिए।
SEBI के आदेश के मुताबिक:
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Avadhut Sathe और उनकी कंपनी ASTAPL को तुरंत सभी अनधिकृत गतिविधियां बंद करनी होंगी।
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उन पर बाजार से जुड़ी किसी भी गतिविधि में हिस्सा लेने पर रोक है।
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सबसे बड़ी बात – उन्हें संयुक्त रूप से 546 करोड़ रुपये, जमा किए गए पैसे से जुड़े ब्याज सहित, निवेशकों को वापस करने होंगे।
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
यह मामला हर उस निवेशक के लिए एक चेतावनी है, जो ऑनलाइन ‘गुरुओं’ और ‘मल्टीबैगर टिप्स’ के चक्कर में पड़ता है।
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रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें: किसी से भी निवेश सलाह लेने से पहले SEBI की वेबसाइट पर जाकर चेक करें कि क्या वह व्यक्ति या कंपनी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर या रिसर्च एनालिस्ट है।
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‘गारंटीड रिटर्न’ पर भरोसा न करें: शेयर बाजार में कोई गारंटी नहीं होती। जो कोई भी तेज मुनाफे का वादा करे, उस पर शक करें।
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शिक्षा और सलाह में अंतर समझें: स्टॉक मार्केट की शिक्षा देना एक बात है, लेकिन सीधे-सीधे बताना कि “कल यह शेयर खरीदो” दूसरी बात है। दूसरी गतिविधि के लिए लाइसेंस जरूरी है।

अंत में, Avadhut Sathe का मामला दिखाता है कि SEBI नकली और अनधिकृत Stock market influencer पर कड़ी नजर रख रही है। निवेशकों की सुरक्षा बाजार की सेहत के लिए जरूरी है। अगली बार जब कोई ऑनलाइन ‘गुरु’ आपको जल्द अमीर बनने का रास्ता दिखाए, तो एक पल रुककर सोचें और उसकी कानूनी वैधता जरूर जांचें। आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे, इससे ज्यादा जरूरी और कुछ नहीं है।
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