10 Minute Delivery Banned: अब नहीं मिलेगा 10 मिनट में सामान! Blinkit, Zepto, Swiggy ने बंद की सर्विस – गिग वर्कर्स की जीत

10 Minute Delivery Banned: अब नहीं मिलेगा 10 मिनट में सामान! Blinkit, Zepto, Swiggy ने बंद की सर्विस – गिग वर्कर्स की जीत


10 Minute Delivery Banned: अब नहीं मिलेगा 10 मिनट में सामान! Blinkit, Zepto, Swiggy ने बंद की सर्विस – गिग वर्कर्स की जीत
10 Minute Delivery Banned: अब नहीं मिलेगा 10 मिनट में सामान! Blinkit, Zepto, Swiggy ने बंद की सर्विस – गिग वर्कर्स की जीत

यार, सच में बड़ी खबर है! वो दिन गए जब आप ऐप पर ऑर्डर करते थे और 10 मिनट का टाइमर देखकर खुश हो जाते थे। अब 10 Minute Delivery Banned हो चुकी है और Blinkit, Zepto, Zomato, Swiggy जैसी बड़ी कंपनियों ने इस फीचर को हटा दिया है।


क्या हुआ असल में?

भाई, बात ये है कि केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इन कंपनियों के साथ कई बैठकें कीं। उन्होंने साफ कह दिया कि ग्राहकों की सुविधा के लिए डिलीवरी बॉयज की जान से खिलवाड़ नहीं चलेगा। और देखो, कंपनियों ने मान भी लिया!

ब्लिंकिट ने तो सबसे पहले एक्शन लिया। उनका पुराना टैगलाइन था “10,000+ प्रोडक्ट्स 10 मिनट में डिलीवर”, जिसे अब बदलकर “30,000+ प्रोडक्ट्स आपके दरवाजे पर” कर दिया गया है। मतलब अब कोई टाइम का वादा नहीं!


गिग वर्कर्स झेल रहे थे कितना प्रेशर?


10 Minute Delivery Banned
10 Minute Delivery Banned

सोचो जरा! 10 मिनट में डिलीवरी का मतलब क्या होता है? ऑर्डर आया, पैक हुआ, निकला और पहुंचा – ये सब 10 मिनट में? इसका सीधा मतलब है कि डिलीवरी बॉय को पागलों की तरह गाड़ी भगानी पड़ती थी।

ट्रैफिक रूल्स? कौन देखे!
अपनी सेफ्टी? बाद में!
बस टाइम पर पहुंचना है!

दिल्ली में अकेले 30,000 से ज्यादा गिग वर्कर्स इन क्विक कॉमर्स ऐप्स से जुड़े हैं। ये लोग भीषण गर्मी में, तेज बारिश में, कड़ाके की ठंड में – हर मौसम में सड़कों पर रहते हैं। और ऊपर से टारगेट का प्रेशर अलग!


संसद में गूंजा गिग वर्कर्स का दर्द

AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने कहा था कि ये डिलीवरी पार्टनर्स हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें क्या मिलता है? न ठीक से सैलरी, न इंश्योरेंस, न कोई सोशल सिक्योरिटी!

जब 10 Minute Delivery Banned होने की खबर आई तो राघव चड्ढा ने ट्वीट करके खुशी जताई। उन्होंने लिखा, “सत्यमेव जयते, हम सब की जीत हुई!”

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा

क्या अब डिलीवरी में ज्यादा टाइम लगेगा?

देखो, कंपनियों ने 10 मिनट का वादा तो हटा दिया है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि अब एक घंटा लगेगा। डिलीवरी फास्ट रहेगी, बस अब कोई फिक्स टाइम का प्रेशर नहीं होगा। मतलब अगर 15-20 मिनट भी लग गए तो डिलीवरी बॉय पर पेनल्टी नहीं लगेगी।

असल में ये बदलाव सिस्टम में है। पहले अगर 10 मिनट से ज्यादा टाइम लगता था तो डिलीवरी पार्टनर की रेटिंग गिरती थी, इंसेंटिव कटता था। अब ऐसा नहीं होगा।


सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 क्या है?

एक अच्छी बात ये भी है कि सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए कानून भी बनाया है। कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत अब इन वर्कर्स को:

  • लाइफ इंश्योरेंस मिलेगा
  • एक्सीडेंट इंश्योरेंस मिलेगा
  • हेल्थ बेनिफिट्स मिलेंगे
  • बुढ़ापे में पेंशन जैसी सुविधा मिलेगी

ये कानून 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुका है। इसके लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनेगा और नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड गिग वर्कर्स के हक के लिए काम करेगा।


कंपनियों का क्या कहना है?

अभी तक कंपनियों ने कोई बड़ा स्टेटमेंट नहीं दिया है, लेकिन उनका एक्शन सब कुछ बता रहा है। ब्लिंकिट ने अपना टैगलाइन बदल दिया, बाकी कंपनियां भी जल्द ऐसा करेंगी।

सच कहूं तो ये एक अच्छी शुरुआत है। कंपनियां अब समझ रही हैं कि बिजनेस तभी चलेगा जब उनके वर्कर्स सेफ और खुश रहेंगे।


आम लोगों की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर ज्यादातर लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि 10 मिनट की जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं थी। 20-30 मिनट में भी सामान आ जाए तो क्या फर्क पड़ता है?

हां, कुछ लोग हैं जो इस बदलाव से खुश नहीं हैं। लेकिन भाई, किसी की जान से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं होता!



Final Words

तो दोस्तों, 10 Minute Delivery Banned होना एक बड़ी जीत है – गिग वर्कर्स की, उनके परिवारों की, और इंसानियत की। उम्मीद है कि आगे भी ऐसे फैसले आते रहेंगे जो वर्कर्स की सेफ्टी को प्राथमिकता दें।

अगली बार जब डिलीवरी में 5-10 मिनट एक्स्ट्रा लगे, तो गुस्सा मत होना। सोचना कि सामने वाला भी किसी का बेटा है, किसी का भाई है, किसी का पापा है!


Disclaimer:

यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। कंपनियों की पॉलिसी समय-समय पर बदल सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी को वेरिफाई करने के लिए कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप देखें। यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है।

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